Sandhikal Ki sandhi Badao…


संधिकाल  की संधि बढाओ

संत श्री  आसारामजी अमृतवाणी

हरिद्वार महाकुम्भ

ध्यान योग शिविर

२४ मार्च २०१०

सत्संग के मुख्य अंश

* शरीर से कर्म होता है , जीवन मुक्त महापुरुष से क्रिया होती है और भगवान से लीला होती है ……

* संधिकाल की संधि बढाओ …स्वास आया और गया उसके बीच को बढाओ , …विचार आया और गया उसके बीच को बदो …वही  परमात्म देव है

* या दूसरा तरीका है …ओमकार विनियोग करके …अंतर्यामी परमात्मा की प्राप्ति के लिए ओमकार का जप करते जाओ …होठों से …स्वाभविक रूप से जपते जपते भगवन में शांत होते जाओ …ॐॐॐॐॐॐॐॐ हरी ॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

* बाहर की स्थिति बदल कर भजन नहीं होता …हर अवस्था में इस भजन के प्रसाद में आ जाओ , बाकि सब ठीक हो जायेगा ….

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Poll


Sant Shri Asaramji Amritvani

Haridwar Mahakumbha

Dhyan Yog Shivir

24 March 2010

Satsang Ke Mukhya Ans :

* sarir se karm hota hai , jivan mukta mahapurush se kriya hoti hai aur bhagwan se lila hoti hai …..

* sandhikaal ka sandhi badao ….swas gaya aur aaya uske bich ko badao , vichar aaya aur gaya uske bich ko badao ….vahi parmatma dev hai

* ya dusra tarika hai ….omkar viniyog kar ke antaryami parmatma ki prapti ke omkar ka jap karte jao …hoton se…swabhavik rup se japte japte bhagwaan me shnat hote jao….om om om om hari om om om hari om om om

* bahar ki sthiti badal ke bhajan nahi hota …har avastha me is bhajan ke prasad me aa jao , baki sab thik ho jayega …..

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Jahan Bhi Guruver Charan Dharen …


श्री सुरेशानंदजी की अमृतवाणी

उत्तरायण ध्यान  योग शिविर

जनवरी २०१० , उज्जैन

भजन

श्रद्धा भाव से गुरु प्रेम में भक्त जो मारे गोता है , बिन मांगे सब कुछ वो पता , उसका मंगल होता है

गुरु ज्ञान के सूरज से फिर रात न रहती काली है

जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती  नसीबों वाली है

हम तो जाते भूल उन्हें पर वो  तो पास ही रहते हैं , उनका ह्रदय कोमल निर्मल सदा वो हित ही करते हैं

हम सबका जीवन एक बगिया , वो बगिया के माली हैं

जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती  नसीबों वाली है

गुरु शिष्य का रिश्ता जग में सबसे प्यारा होता है , पवन हो जाता है वो जो गुरु की याद में रोता है

गुरु आज्ञा मानी तो समझो अपनी बिगड़ी बना ली है

जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती  नसीबों वाली है …

इनके चरणों में सुख सच्चा , सरे तीर्थ धाम यही , गुरु जो देते उससे ऊँचा होता है कोई नाम नहीं

सार्थक है  बस उसका जीवन , जिसने भक्ति पा ली है

जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती  नसीबों वाली है …

निगुरे निंदक महा पापी निर्दोष पे डिश लगते है , फिर भी कैसा संत ह्रदय वो सब कुछ सहते जाते हैं

कर्मों की गति गहन है निंदक मद में फुले जाते हैं , ऐसे महापापी तो सीधे नरक कुंड में जाते हैं

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POLL


Shri Sureshanandji Ki Amritvani

Uttarayan Dhyan Yog Shivir

Jan 2010 , Ujjain

Bhajan

shraddha bhaav se guruprem me bhakt jo mare gota hai

bin mange sab kuch vo pata , uska mangal hota hai

guru gyan suraj se fir , raat na rahti kaali hai

jahan bhi guruver ….

ham to jate bhul unhe , per vo to pass hi rahte hain

unka hriday komal nirmal sada vo hit hi kerte hain ,

ham sabka jivan ek bagia vo bagia ke mali hain

jahan bhi guruver ….

guru shishya ka rishta jag me sabse pyara hota hai

pavan ho jata hai vo jo guru ki yaad me rota hai

guru agaya mani to samjho apni bigdi bana li hai

jahan bhi guruver …

inke charno me sukh saccha sare tirth dhaam yahi

guru jo dete usse uncha hota hai koi naam nahi

sarthak bas uska jivan , jisne bhakti paa li hai

jahan bhi guruver ….

santon ki ninda jo karte apna vansh mitate hain

niguru nindak mahapapi nirdosh pe dosh lagate hain

fir bhi kaisa sant hriday vo sab kuch sahte jate hain

karma ki gati gahan hai nindak mad me fule jate hain

aise mahapapi to sidhi narak kund me jate hain