Jahan Bhi Guruver Charan Dharen …


श्री सुरेशानंदजी की अमृतवाणी

उत्तरायण ध्यान  योग शिविर

जनवरी २०१० , उज्जैन

भजन

श्रद्धा भाव से गुरु प्रेम में भक्त जो मारे गोता है , बिन मांगे सब कुछ वो पता , उसका मंगल होता है

गुरु ज्ञान के सूरज से फिर रात न रहती काली है

जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती  नसीबों वाली है

हम तो जाते भूल उन्हें पर वो  तो पास ही रहते हैं , उनका ह्रदय कोमल निर्मल सदा वो हित ही करते हैं

हम सबका जीवन एक बगिया , वो बगिया के माली हैं

जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती  नसीबों वाली है

गुरु शिष्य का रिश्ता जग में सबसे प्यारा होता है , पवन हो जाता है वो जो गुरु की याद में रोता है

गुरु आज्ञा मानी तो समझो अपनी बिगड़ी बना ली है

जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती  नसीबों वाली है …

इनके चरणों में सुख सच्चा , सरे तीर्थ धाम यही , गुरु जो देते उससे ऊँचा होता है कोई नाम नहीं

सार्थक है  बस उसका जीवन , जिसने भक्ति पा ली है

जहाँ भी गुरुवर चरण धरे वो धरती  नसीबों वाली है …

निगुरे निंदक महा पापी निर्दोष पे डिश लगते है , फिर भी कैसा संत ह्रदय वो सब कुछ सहते जाते हैं

कर्मों की गति गहन है निंदक मद में फुले जाते हैं , ऐसे महापापी तो सीधे नरक कुंड में जाते हैं

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Shri Sureshanandji Ki Amritvani

Uttarayan Dhyan Yog Shivir

Jan 2010 , Ujjain

Bhajan

shraddha bhaav se guruprem me bhakt jo mare gota hai

bin mange sab kuch vo pata , uska mangal hota hai

guru gyan suraj se fir , raat na rahti kaali hai

jahan bhi guruver ….

ham to jate bhul unhe , per vo to pass hi rahte hain

unka hriday komal nirmal sada vo hit hi kerte hain ,

ham sabka jivan ek bagia vo bagia ke mali hain

jahan bhi guruver ….

guru shishya ka rishta jag me sabse pyara hota hai

pavan ho jata hai vo jo guru ki yaad me rota hai

guru agaya mani to samjho apni bigdi bana li hai

jahan bhi guruver …

inke charno me sukh saccha sare tirth dhaam yahi

guru jo dete usse uncha hota hai koi naam nahi

sarthak bas uska jivan , jisne bhakti paa li hai

jahan bhi guruver ….

santon ki ninda jo karte apna vansh mitate hain

niguru nindak mahapapi nirdosh pe dosh lagate hain

fir bhi kaisa sant hriday vo sab kuch sahte jate hain

karma ki gati gahan hai nindak mad me fule jate hain

aise mahapapi to sidhi narak kund me jate hain